स्वच्छता अभियान की कार्यालय के भीतर उड़ रही धज्जियां, जगह जगह पड़े मिले पान मसाला के पीक

उन्नाव(आरएनएस)। विकास की लहर जिस कार्यालय से होकर गुजरती है अगर वहीं विकास से अछूता रहा जाये तो इसे आप क्या कहेगें। विभागीय उदासीनता की हद को पार करता विकास भवन इस समय गंदगी का केंद्र बना हुआ है। यहां पर शौचालय का निर्माण तो करवा दिया गया लेकिन सेफ्टी टैंक बनवाना उचित नहीं समझा। इसे इस तरह से समझ सकते है कि निर्माण तो हुआ लेकिन वह किसी के काम का न निकला। उक्त शौचालय की दीवार पर वहां से गुजरने वाले कर्मचारी व आमजन मूत्र परित्याग करते है। ऐसे में बड़ा सवाल ये खडा होता है कि विकास के रहनुमा आखिर किस इंतजार में है कि व्यवस्था सुधरे। विकास भवन कार्यालय के अन्दर सीढियां चढने पर जब ऊपर नजर जाती है तो श्वेत रंग से लिखी हुई एक लिखावट नजर आती है जिसमें स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण उन्नाव सहित सफाई संबंधी बातें अंकित होती है। नीचे नजर जाने पर पान मसाले की पीक से सनी हुई एक दीवार अपनी बदहाली पर आंसू बहाती नजर आती है। या यूं कहे कि विकास की डगर भले ही उक्त कार्यालय के पनघट से होकर गुजरती हो लेकिन विकास कार्यालय स्वच्छता के नाम पर एक मरीचिका सी नजर जाती है। स्वच्छता के नाम पर अफसर बडे बडे आयोजन कराते नजर आते है, लेकिन हकीकत की बानगी कुछ और ही बयां करती है। बता दें कि इस निर्माण के लिए लगभग तीन लाख पंद्रह हजार रुपये दिए गये थे। चर्चा यह भी है कि कार्यदायी संस्था ने दो साल बाद भी हस्तांतरण नही किया। विकास भवन परिसर में दो साल पहले कार्यदायी संस्था आरईएस ने एक शौचालय भवन का निर्माण कराया था। लेकिन अब तक उक्त शौचालय के बाहर ताला लटका ही रहता है। जानकारी यह मिल रही है कि ठेकेदार भी इस निर्माण में परेशान है। दो साल से उसका भुगतान भी लटका हुआ है शायद इसी लिए वहां भी ताला लटक रहा है। शौचालय के पीछे की दीवारों पर घास व बेल इत्यादि लटक रही है जिससे वहां की बाहरी सुंदरता प्रभावित हो रही है।

 

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