कालपी जालौन- पालिका बाजार को लेकर वन विभाग व नगर पालिका परिषद के बीच चल रही है कागजी जंग अब धरातल पर आ गई है सोमवार को वन विभाग ने दुकानों के निर्माण कार्य को रोक दिया है विभाग के इस कदम से पालिका परिषद में खलबली मची है।

गत 2 वर्ष पूर्व कोरोना काल के दौरान नगर पालिका परिषद ने नगर में खाली पड़ी जमीन पर दुकानें बनाने का प्रस्ताव पास किया था तथा प्रथम चरण में वन विभाग परिसर के बाहर पड़ी जमीन पर 30 दुकानों का निर्माण शुरू हुआ था जो कुछ ही दिन में बनकर तैयार हो गई थी इतना ही नहीं इन दुकानों की हुई सार्वजनिक नीलामी से पालिका परिषद को भारी आय हुई थी इससे उत्साहित नगर पालिका प्रशासन ने दूसरे चरण में 27 दुकानों का निर्माण शुरू करा दिया था जो अब अंतिम चरण में है लेकिन काम पूरा हो पाता इससे पहले वन विभाग ने उक्त जमीन को संरक्षित वन क्षेत्र बताकर नगर पालिका परिषद कालपी प्रशासन को एक नोटिस दिया है जिसमें भूमि के स्वामित्व को लेकर दस्तावेज मांगे गए हैं वन विभाग के सूत्रों की माने तो पालिका प्रशासन ने इस मामले में विभाग को पत्र दिया है जिसमें उक्त भूमि को सार्वजनिक निर्माण विभाग का बताया गया है रेंजर संजय यादव के मुताबिक विभागीय नियमानुसार तथा दस्तावेजों में वह तो जमीन संरक्षित वन क्षेत्र जिसमें वन कार्य के अलावा कुछ भी नहीं किया जा सकता है। वही डीएफओ जेपी नारायण त्रिपाठी के अनुसार उक्त जमीन वन विभाग के कब्जे में है और पालिका परिषद ने निर्माण कराया है वह अवैध है और इसी के चलते रविवार को वन विभाग ने दुकानों का निर्माण कार्य रोक दिया है वही निर्माण का रुकने से पालिका प्रशासन में खलबली मची गयी है और सोमवार को उसी मामले को लेकर पालिका चेयरमैन प्रतिनिधि व सभासदों के अलावा पालिका के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ बैठकों का दौर जारी है। जिसमें वन विभाग द्वारा काम रोके जाने के मुद्दे को लेकर गहन विचार विमर्श किया जा रहा है।नगर पालिका परिषद कालपी के अधिशासी अधिकारी पवन कुमार ने दूरभाष पर बताया कि उन्होंने इस प्रकरण में अपने पूरे पक्ष को अपर जिलाधिकारी के समक्ष रखा है तथा इस पुरे मामले से उन्हें अवगत कराया है।
