लखनऊ : लेसा की ही लैब में इंजीनियरों, मीटर परीक्षकों व संविदाकर्मियों का सिंडिकेट पांच साल से बिजली चोरी कराने वाले बनावटी मीटर बना रहा है। रविवार को एसटीएफ की गिरफ्त में आए इलेक्ट्रॉनिक मीटर में छेड़छाड़ कर बिजली चोरी करने वाले गिरोह के पांच लोगों से पूछताछ के बाद पड़ताल में यह मामला सामने आया है।
सिंडीकेट लैब में ऐसे मीटर बना रहा है, जो कुल जलने वाली बिजली यूनिट को 40 से 50 फीसदी ही दर्ज करते हैं। इसके बदले बिजली चोरी करने के इच्छुक उपभोक्ताओं से पांच से दस हजार रुपये वसूले जाते हैं। यह खेल करने के लिए पहले उपभोक्ता से मीटर खराब होने की शिकायत दर्ज करवाई जाती है। फिर सिंडिकेट नए मीटर की मशीन को निकालकर सुस्त करने के बाद उसे पुराने मीटर की मशीन की जगह लगा देता है। इससे मीटर का डिब्बा पुराना दिखता है पर उसमें मशीन नई होती है।
मेकर नंबर से खुल चुकी पोल, पर कार्रवाई नहीं
इस खेल की पोल मेकर नंबर से खुल चुकी है, लेकिन अब तक किसी पर कार्रवाई नहीं हुई। चौक खंड के एक अभियंता ने बताया कि उसने ऐसे दो मीटर पकड़े थे, जिनमें मेकर नंबर अलग-अलग था। परीक्षण खंड के जिम्मेदार अभियंता को पुराने डिब्बे वाले मीटर में नई मशीन मिलने की जानकारी पत्र से दी गई। साथ ही सूचना मांगी गई कि नई मशीन के मेकर नंबर वाले मीटर किसे जारी किए गए, हालांकि जानकारी नहीं दी गई। सीतापुर रोड खंडीय इलाके में भी ऐसा मामला सामने आ चुका है। कंपनी जो मीटर बनाती है, उस पर मेकर नंबर का उल्लेख होता है। मीटर के डिब्बे व अंदर मशीन में मेकर नंबर समान होता है। मशीन में यह डिस्प्ले सेंटर के ठीक नीचे होता है। यदि किसी मीटर के डिब्बे व मशीन का मेकर नंबर अलग-अलग है तो यह उसमें छेड़छाड़ की पुष्टि करता है।
यहां करीब तीन हजार बनावटी मीटर
अनुमान है कि करीब तीन हजार बनावटी मीटर से बिजली चोरी की जा रही है। यह खेल अमीनाबाद के कुछ बाजारों, कैसरबाग, मौलवीगंज, पांडेयगंज, दुगावां, यहियागंज, राजाबाजार, नादान महल रोड, नक्खास, अकबरी गेट, बजाजा, हुसैनाबाद, मुफ्तीगंज, महबूबगंज, चौपटिया, ठाकुरगंज, नैपियर रोड कॉलोनी, राधा ग्राम, दौलतगंज, आजादनगर, यासीनगंज, फैजुल्लागंज, केशवनगर, सीतापुर रोड पर चल रहा है।
दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लखनऊ के निदेशक (वाणिज्य) – योगेश कुमार का कहना है कि एसटीएफ की जांच में विभाग के जो अभियंता एवं कर्मचारी दोषी पाए जाएंगे, उन पर सख्त कार्रवाई होगी। सुस्त मीटरों की पहचान करने के लिए किसी एजेंसी को जांच देने पर भी विचार-विमर्श चल रहा है।
