वेद ही सनातन धर्म हैं : बाबा फुल संदे वाले

एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा गुरु मंत्र के प्रणेता बाबा फुलसंदे वालों ने द्विदिवसीय सत्संग के दूसरे दिन सनातन धर्म को परिभाषित करते हुए कहा कि वेद ही सनातन धर्म हैं वेदों को जाने बिना कोई भी हिन्दू यह नहीं जान सकता कि  हिन्दू धर्म क्या है।

समिति की ओर से आयोजित शक्ति टैंट हाउस के निकट गुरुद्वारा हाल जोगीपुरा में उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि वेदों के ज्ञान के बिना हम महापुरूषों के इतिहास को नहीं जान सकते हैं। जो लोग वेदों की आलोचना करते हैं, वो वेदों की महत्ता से अनभिज्ञ हैं उन्होंने वेदों का ठीक प्रकार से अध्ययन नहीं किया है।

एक प्रसंग के माध्यम से गुरु महाराज ने स्पष्ट किया कि भारत की आत्मा को जानने के लिए वेदों की शिक्षा जरूरी है क्योंकि वर्तमान शिक्षा पद्धति से आज की युवा पीढ़ी संस्कारों से भटकती जा रही है, इसलिए विद्यालयों में चारों वेदों के कम से कम एक-एक सूत्र को पढ़ाया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन तभी सार्थक होगा जब वह स्वयं संस्कारित होकर अपने बच्चों को संस्कारी बनाये। बिना संस्कारों के मानव जीवन व्यर्थ है। हमारे देश को वैदिक युग में विश्व गुरु मानने का मुख्य कारण हमारे संस्कारों और हमारी वैदिक सभ्यता रही है।

उन्होंने कहा कि आज के अभिभावकों को यह भी चाहिए कि वो अपनी संतानों को देश भक्ति की प्रेरणा दें, जिससे उनके अंदर राष्द्र धर्म की भावना जागरुक हो। प्रवचन के बाद मूकबधिर बच्चों को बाबा फुलसंदे वालो के द्वारा अंगवस्त्र व अन्य उपहार वितरित किये गये। महाराज के प्रवचन से पूर्व नगरपालिका परिषद की अध्यक्षा दीपमाला गोयल, अधिशासी अधिकारी दीप वार्ष्णेय सहित रंजीत राठौर, विजय मेंहदीरत्ता, जगदीश धींगड़ा, सुरेश अरोरा, डॉ. विजय बिन्दु, सुभाष मैथिल, अमर पाल सिंह, डॉ. योगेन्द्र मौर्य, जवाहर सिंह यादव, चन्द्र पाल सरल, पवन शंखधार, गुरुचरन मिश्र, रजनी मिश्रा, अर्चना गुप्ता व विवेक खुराना, जगदीश सरन, महेश मित्र व सुरेन्द्र गौड़ आदि ने बाबा फुलसंदे वालो को फूल मालाएं पहनकर उनका सम्मान किया तथा कार्यक्रम के मुख्य आयोजक साहित्यकार अशोक खुराना ने बाबा को अंगवस्त्र भेंट किये। कार्यक्रम में सैकड़ो की संख्या में भक्तजन मौजूद रहे।

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