बदायूँ : 27 सितम्बर। जनपद में मैंथा बहुत बड़े स्तर पर उत्पाद होता है, लेकिन विदेशी बाजार में इसे सप्लाई करने में सप्लायर को विभिन्न प्रकार के अभिलेखों को जुटाना मुश्किल जैसा है, जिसके कारण निर्यात कम होता है। इसी प्रकार बदायूँ में अच्छे किस्म की कालीन बनाई जाती है, लेकिन उसको भी फिनीशिंग के लिए आगरा भेजा जाता है, फिर वहां से विदेश तक उन कालीनों का निर्यात किया जाता है, जिसका लाभ भी जनपद को नहीं मिल पाता। सप्लायर्स को उनके उत्पादों को निर्यात करने के लिए जो समस्याएं होती हैं, उनका निराकरण किया जाएगा।

मंगलवार को कलेक्ट्रेट स्थित सभाकक्ष में जिलाधिकारी दीपा रंजन ने उपायुक्त उद्योग जैस्मिन, एलडीएम श्याम पासवान एवं अन्य सम्बंधित अधिकारियों तथा जनपद के व्यापारियों एवं उत्पादकों के साथ उनके व्यापार को विदेश तक निर्यात करने के सम्बंध में बैठक आयोजित की। बैठक की सह अध्यक्षता करते हुए डीजीएफटी दिल्ली से आई0टी0एस0 रमेश वर्मा ने बताया कि जिला निर्यात योजना, जिला निर्यात कार्य योजना जिले के लिए एक व्यापक योजना है जिसका उद्देश्य सीमित लेकिन टिकाऊ हस्तक्षेपों के माध्यम से निर्यात केंद्रित आर्थिक विकास बनाने की दृष्टि को साकार करना है, जो विशेष रूप से जिला स्तर पर लक्षित है। उन्होंने जनपद से किए जा रहे निर्यात के बारे में निर्यातकों एवं उद्यमियों को जानकारी दी। जनपद से मेन्था का निर्यात किया जा रहा है। वर्ष 2021-22 में मेन्था का निर्यात लगभग 80 करोड़ का किया जा चुका है। मेन्था का निर्यात प्रमुखता अमेरिका व चीन में किया जाता है। निर्यात प्रोत्साहन समिति की बैठक में मेन्था की उत्पादन व निर्यात बढ़ाने के लिए प्रस्तुतीकरण दिया गया एवं सभी निर्यातकों व उद्यमियों से सुझाव आमंत्रित किए गए। बैठक में ही निर्यात हेतु अन्य संभावित उत्पादों की भी पहचान की गई जिनका जनपद से निर्यात संभव है। ऐसे चयनित उत्पादों में जनपद का चिन्हित एक जनपद एक उत्पाद योजना अन्तर्गत जरी-जरदोजी एवं कालीन है। इसकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने हेतु सम्बन्धित हस्तशिल्पियों से सुझाव लिए। बैठक में जनपद में कॉमल फैसिलिटी सेन्टर व हैण्ड हॉल्डिंग के मुख्य सुझाव दिए।

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