संजय शर्मा
देखने वाली बात यह है बिजली विभाग कब बिजली चोरी का मुकदमा लिखाता है परियोजना निदेशक के खिलाफ
बदायूं । प्रदेश की योगी सरकार हर दिन बिजली चोरी को रोकने को लेकर गंभीर है, मुख्यमंत्री के आदेशों का पालन केवल गरीब व असहाय जनता को बिजली चोरी के मुकदमे लाद कर ही विधुत विभाग अपनी पीठ थपथपा लेता है, बिजली विभाग के द्वारा नहीं सरकारी विभागों व अधिकारियों के आवासों की न तो लोड चैक किया जाता है नहीं बकाया में कनेक्शन काटा जाता है।
लेकिन जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के द्वारा तो हद करके रख दी है इस विभाग ने तो 2019से लेकर आज तक विधुत कनेक्शन के लिए आवेदन ही नहीं किया गया है फिर भी पिछले तीन सालों से एक सरकारी महकमा ही दूसरे सरकारी विभाग को लाखों रुपए का चूना लगा रहे हैं, जबकि जिला ग्राम्य विकास अभिकरण में आधा दर्जन एसी, इतने ही कम्प्यूटर, पंखे, और न जाने कितने हीटर आदि का प्रयोग किया जाता है पूरे जिला ग्राम्य विकास अभिकरण का लोड कम से कम दस किलोवाट का तो है ही इस बिजली चोरी में मुख्यमंत्री किस विभाग की जिम्मेदारी तय करेंगे जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक के वेतन से विधुत के बिल की कटौती करनी चाहिए क्योंकि शासन तो परियोजना निदेशक को बजट हर बर्ष भेजते हैं फिर भी परियोजना निदेशक के द्वारा बिजली चोरी किस मजबूरी में की जा रही है।
आम आदमी पर तो विधुत विभाग फ़ौरन मुकदमा बिजली चोरी का दर्ज करा देता है अब देखना यह है कि सरकारी विभाग परियोजना निदेशक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के खिलाफ बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज कर परियोजना निदेशक के वेतन से विधुत विभाग कब पैसा कटवाने के आदेश मुख्य विकास अधिकारी से करा पाता है ।
