स्वास्थ्य विभाग के आला हुक्मरानों के मिलीभगत के चलते शाहाबाद निजी संचालकों की मंडी बन चुका है झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा बड़े-बड़े नर्सिंग होम मेटरनिटी सेंटर नगर के सभी मार्ग और गलियों में देखे जा सकते हैं परंतु स्वास्थ्य विभाग के आला हुक्मरान इनके प्रति नरम दिखाई देते हैं

शाहाबाद नगर क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा बड़े-बड़े हॉस्पिटल मेटरनिटी सेंटर संचालित किया जा रहे है क्वालिफाइड डॉक्टरों की डिग्रियां लगाकर उनसे मासिक रकम तय करने के बाद स्वास्थ्य विभाग का रजिस्ट्रेशन कराने के बाद बड़े-बड़े हॉस्पिटल और मैटरनिटी सेंटर संचालित किए जा रहे हैं स्वास्थ विभाग के आला हुक्मरान उन्हें रजिस्ट्रेशन के नाम पर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने का खुला लाइसेंस दे रहे हैं एक एक झोलाछाप डॉक्टर तीन तीन बड़े हॉस्पिटल संचालित कर रहा है. झोलाछापो ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहाबाद आशा बहुओं से भी सांठगांठ कर रखी है महीने में एक दो बार आशा बहुओं को अपने हॉस्पिटल मैं मीटिंग करके उन्हें गिफ्ट हैपर देते हैं साथ ही गर्भवती महिलाओं को भर्ती कराने के नाम पर भारी कमीशन रकम भी दे रहे हैं यही कारण है कि अधिकांश आशा बहुएं गर्भवती महिलाओं को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहाबाद ना पहुंचकर सीधे इन झोलाछाप हॉस्पिटल और मैटरनिटी सेंटर ही पहुंच रही है एक बात आपको और बता दें आशा बहुओं के नाम से तो इन झोलाछाप हॉस्पिटलों का काम तो चल ही रहा है इसके अतिरिक्त इन हॉस्पिटल और मैटरनिटी सेंटर में काम करने वाले लड़के आपको सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहाबाद के अंदर बाहर घूमते हुए मिल जाएंगे इनका काम सिर्फ इतना है मरीजों को बहला-फुसलाकर इन डग्गामार हॉस्पिटल और मैटरनिटी सेंटर मैं ले जाते है
उसके बाद भर्ती की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह लोग मरीज के साथ आए हुए तीमारदार को मरीज की जान का भय दिखाते हैं और फिर शुरू होता है ऑपरेशन का खेल जबकि मरीज की नॉर्मल डिलीवरी की पूरी संभावना होती है उसके बाद भी तीमारदार को भय दिखाकर ऑपरेशन कर दिया जाता है और मोटी रकम वसूल ली जाती है कमीशन बाजी का यह खेल पिछले कई वर्षों से चल रहा है परंतु अभी कुछ दिनों से इस खेल ने काफी जोर पकड़ लिया जब तक इन हॉस्पिटलों में कोई घटना घटित नहीं हो जाती तब तक स्वास्थ्य विभाग आंख मूंदकर हाथ पर हाथ धरे बैठा रहता है जैसे ही कोई घटना घटित होती है फिर शुरू होता है विभाग का भी खेल ताला तालाबंदी से शुरू हुआ खेल ताला खुलवाने तक जारी रहता है इसका ही जीता जागता उदाहरण जनपद के न्यू संजीवनी हॉस्पिटल में देखने को मिला था जब उद्घाटन वाले दिन ही हॉस्पिटल को डिप्टी सीएमओ के द्वारा सील करना पड़ा या खेल क्या गुल खिलाएगा यह तो राम जाने।
