इस हफ्ते के आखिरी दो दिनों में भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के लिए 3 बड़े पर्व रहेंगे। इनमें शनिवार को माघ महीने की आखिरी एकादशी और अगले दिन तिल द्वादशी रहेगी। रविवार को द्वादशी के साथ सूर्य का राशि परिवर्तन होने से कुंभ संक्रांति पर्व भी रहेगा। ग्रंथों में बताया गया है कि संक्रांति पर्व पर नारायण रूप में सूर्य की करने से हर तरह के दोष और पाप खत्म हो जाते हैं। इनके दो दिन बाद 16 फरवरी को माघी पूर्णिमा महापर्व रहेगा।
अजा / जया एकादशी (12 फरवरी, शनिवार):
इस दिन माघ महीने की एकादशी रहेगी। इसे अजा या जया एकादशी भी कहते हैं। स्कंद पुराण मुताबिक इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और तिल दान के साथ ही तुलसी पूजा का भी महत्व है।
महत्व: इस एकादशी को करने से से मोक्ष मिलता है यानी दोबारा जन्म नहीं लेना पड़ता। इसलिए इसे अजा कहा जाता है। इस दिन व्रत करने से हर तरह के कष्ट और पापों का नाश होता है और मोक्ष मिलता है। एकादशी पर तिल का दान करने से कई गुना पुण्य मिलता है। विद्वानों का कहना है कि तिल दान करने पर स्वर्ण और कन्यादान जितना पुण्य मिलता है।
तिल द्वादशी और कुंभ संक्रांति (13 फरवरी, रविवार):
माघ महीने की एकादशी के अगले दिन तिल द्वादशी व्रत किया जाता है। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर तीर्थ स्नान किया जाता है। ये न कर पाएं तो घर पर ही पानी में तिल और गंगाजल मिलाकर नहा सकते हैं। फिर ऊँ सूर्य नारायणाय नम: मंत्र बोलकर उगते हुए सूर्य को जल चढ़ाएं। इसके बाद तिल के जल से भगवान विष्णु का अभिषेक किया जाता है और अन्य पूजन सामग्री के साथ तिल भी चढ़ाए जाते हैं। पूजा के बाद तिल का ही नैवेद्य लगाया जाता है और उसका प्रसाद लिया जाता है।
महत्व:
इस दिन भगवान विष्णु और सूर्य देवता की पूजा करने से जाने-अनजाने में हुए हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं। कुंभ संक्रांति के योग में तिल द्वादशी का व्रत करने से हर तरह का सुख और वैभव मिलता है। ये व्रत कलियुग के सभी पापों का नाश करने वाला व्रत माना गया है। पद्म पुराण में बताया गया है कि इस व्रत में ब्राह्मण को तिलों का दान, पितृ तर्पण, हवन, यज्ञ, करने से अश्वमेध यज्ञ करने जितना फल मिलता है।
