जिला संवाददाता विजय कुमार वर्मा
बदायूँ : भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के तीन दिन बाद एकादशी को यहां धार्मिक उत्साह के मनाए जाने की परंपरा है। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव एकादशी के चलते सोमवार को सुसज्जित मंदिरों की शोभा देखते ही बनी। बिजली के नए-नए प्रकार के आइटमों से मंदिर आकर्षक छवि बिखेरते नजर आए।

एकादशी पर मंदिरों को सजा कर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन मनाया जाता है। जन्माष्टमी के बाद एकादशी जैसा धार्मिक महत्व का दिन पहला होता है। इसलिए भी इसकी बड़ी महत्ता है।


सोमवार को सूरज ढलते ही बिजली की रोशनी से जगमगाती सड़कों पर रौनक लौट आई। बाकी दिनों से आज का दिन विशेष था। गली-गली मंदिरों में जहां देवी देवताओं को नवीन वस्त्रों और आभूषणों से अलंकृत किया गया था, वहीं मंदिर बिजली झालरों से जगमगाते नजर आ रहे थे। बच्चों को आकर्षित करने के लिए मंदिरों में कई स्वचालित झांकियां बनाई गईं थीं। कृष्ण के जीवन की कथा से जुड़ी झांकियां आकर्षक का केंद्र रहीं। शहर का पुराना बाईपास का गौरव हासिल करने वाली काली सड़क पर सबसे अधिक भीड़ दिखी।

इस मार्ग पर प्रसिद्ध बिरुआबाड़ी मंदिर, हर प्रसाद मंदिर, नाराण मंदिर, रघुनाथ मंदिर पंजाबी मंदिर आदि को रास्ता हैं। इसलिए यहां सबसे अधिक रौनक रही।

यही नही नगला मन्दिर की आकर्षक सजावाट देखने को जनसमूह उमड़ पड़ा। रेलवे स्टेशन कचहरी रोड और मोहल्लों में पुराने मंदिरों में भी अतुलनीय सजावट हुई। एकादशी पर भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने पहले ही रणनीति बना ली थी। सीसीटीवी कैमरों के अलावा प्रमुख स्थानों पर पुलिस की पिकेट लगाई गई। मोबाइल पुलिस टीमें भी जायजा लेती रहीं। पुलिस के लिए सबसे ज्यादा चुनौती काली सड़क पर भीड़ और पथिक चौक से बिरुआबाड़ी मंदिर तक लगे मेला की सुरक्षा को लेकर थी। एकादशी पर मंदिर दर्शनार्थियों की अत्याधिक भीड़ और पिछली घटनाओं को देखते हुए एकादशी पर बिजली व्यवस्था को हर साल बिजली अधिकारियों को चेता दिया जाता है कि लोड को देखते हुए व्यवस्थाएं दुरुस्त रखें। लाइनमैनों के दल बनाकर इस मौके पर विशेष निगरानी रखी जा रही थी। बावजूद इसके बिजली अधिकारियों की धुकधुकी बनी रही।
