बदायूँ। आज दुर्गा मंदिर निकट पुरानी चुंगी के प्रांगण में श्री गणेश जन्मोत्सव के उपलक्ष में सभी भक्तों के साथ चतुर्थ दिवस में गणेश जी की पूजा अर्चना की गई एवं दूर्वा घास से वनी माला पहनाकर बिशेष श्रंगार किया गया। और मोदक का भोग लगया गया।
आचार्य त्रिलोक कृष्ण मुरारी ने बताया गणेश जी को क्यों प्रिय हैं मोदक गणेश जी को विघ्नहर्ता यूं ही नही कहा जाता, दरअसल किसी पूजा, आराधना, अनुष्ठान या मांगलिक कार्य में कोई विघ्न या बाधा न आए। इसलिए सर्वप्रथम गणेशजी की पूजा करके उनकी कृपा प्राप्त की जाती है। कार्य पूर्ण होते ही गणेशजी को उनका प्रिय भोग मोदक तथा लड्डू का भोग चढ़ाया जाता है। आखिर क्या है मोदक तथा क्यों पसंद है यह गणेशजी को। मोदक का अर्थ होता है आनंद देने वाला। मोदक गणेशजी के इसी व्यक्तित्व को दर्शाता है। गणेशजी मोदक खाकर खुद भी आनंदित होते हैं तथा अपने भक्तों को भी आनंदित करते हैं।
एक कथा के अनुसार गणेश पुराण में देवताओं ने अमृत से बना एक मोदक देवी पार्वती को भेंट किया। गणेशजी ने जब माता पार्वती से मोदक के गुणों के बारे में जाना तो उन्हें उसे खाने की इच्छा तीव्र हो उठी। ऐसे का प्रिय हो गया।
इस मौके पर दुर्गा मंदिर प्रबंध समिति के सचिव पुनीत कुमार कश्यप एडवोकेट,, हेतराम कश्यप, जुगेन्द्र पांडे सुनील कुमार, अरबिन्द दिवाकर, शंकर लाल आनन्द कश्यप, उपेन्द्र कश्यप आदि भक्त जन उपस्थित रहे।

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