मेलबर्न :  भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ‘क्वाड’ पर चीन के विरोध को शनिवार को खारिज कर दिया और कहा कि चार देशों का यह संगठन “सकारात्मक काम” करेगा तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि कायम रखने के प्रति योगदान देगा।

जयशंकर ने कहा कि ‘क्वाड’ की आलोचना करने से इसकी विश्वसनीयता कम नहीं होगी। क्वाड के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों- अमेरिका के एंटनी ब्लिंकन, जापान के योशिमासा हयाशी और ऑस्ट्रेलिया की मारिस पायने के साथ शुक्रवार को जयशंकर ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र को “दबाव” से मुक्त रखने के लिए सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के आक्रामक तेवरों पर परोक्ष रूप से संदेश देने के उद्देश्य से “दबाव” शब्द का इस्तेमाल किया गया है।

जयशंकर ने यहां अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा, “कल हम चारों, हम दोनों और ब्लिंकन तथा हयाशी एक बिंदु पर सहमत हुए कि हम यहां सकारात्मक चीजें करने आए हैं। हम क्षेत्र की शांति, समृद्धि और स्थायित्व में योगदान देंगे। हमारा इतिहास, कार्य और रुख स्पष्ट है और बार-बार इसकी आलोचना करने से इसकी विश्वसनीयता कम नहीं हो जाएगी।” जयशंकर के साथ पायने ने कहा कि क्वाड “किसी के खिलाफ नहीं है।”

पायने ने कहा, “हम विश्वास और लचीलेपन के निर्माण की बात कर रहे हैं। हम ऐसे क्षेत्र को प्रोत्साहित करने की बात कर रहे हैं जहां सभी देश संप्रभु और सुरक्षित महसूस कर दबाव या धमकी से मुक्त होकर काम कर सकें। हमारे पास एक वास्तविक व्यावहारिक एजेंडा है। इसका सबूत है कि क्वाड नेताओं की प्रतिबद्धता के तहत टीके की 50 करोड़ से खुराक अन्य देशों को दी गई।”

 

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