नयी दिल्ली, एजेंसी।  राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मुंबई और कोलकाता की जेलों में दो कैदियों के आत्महत्या के मामले को बुधवार को गंभीरता से लेते हुए इस संबंध में महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विधि सेवा प्राधिकरण के सचिव से चार सप्ताह के भीतर संबंधित राज्यों में जेलों की स्थिति पर जवाब मांगा है।

इन मामलों से संबंधी कार्रवाई के दौरान एनएचआरसी ने एक बयान में कहा कि ये घटनाएं ‘‘महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की जेलों में कुप्रबंधन’’ का खुलासा करती हैं। बयान के अनुसार, ‘‘एनएचआरसी ने नवी मुंबई में तलोजा केंद्रीय कारागार और कोलकाता में दमदम केंद्रीय सुधार गृह में दो कैदियों की आत्महत्या के कारण हुई मौत और मामला संज्ञान में आने के बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा अपेक्षित रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करने को गंभीरता से लिया है।’’

एनएचआरसी ने कहा कि जेल नियमावली में ऐसे वातावरण प्रदान करने के पर्याप्त प्रावधान हैं, जो किसी भी कैदी को आत्महत्या के लिए नहीं उकसा सकते हैं। यही कारण है कि जेल की कोठरियों में छत के पंखे और हैंगिंग हुक नहीं लगाए जाते हैं।

आयोग ने कहा कि नवी मुंबई के तलोजा केंद्रीय कारागार में एक विचाराधीन कैदी ने 27 मई, 2020 को आत्महत्या कर ली, जबकि कोलकाता में दमदम केंद्रीय सुधार गृह में एक दोषी कैदी ने 28 अप्रैल, 2020 को इलाज के दौरान एसएसके अस्पताल में आत्महत्या कर ली।

बयान के अनुसार दोनों मामलों में आयोग ने क्रमश: मुंबई और कोलकाता उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार के माध्यम से विधि सेवा प्राधिकरण के सचिव को चार सप्ताह के भीतर महाराष्ट्र एवं पश्चिम बंगाल की जेलों की स्थिति पर रिपोर्ट देने को कहा है।

 

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