नयी दिल्ली, एजेंसी। राज्यसभा में सोमवार को शीतकालीन सत्र के पहले दिन बैठक काफी हंगामेदार रही जिसमें विपक्ष के शोरगुल के बीच तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को खत्म करने संबंधी एक विधेयक बिना चर्चा के पारित हो गया जबकि पिछले मॉनसूस सत्र में ‘‘अशोभनीय आचरण’’ के कारण 12 विपक्षी सदस्यों को वर्तमान सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। हंगामे के कारण चार बार के स्थगन के बाद बैठक तीन बज कर करीब बीस मिनट पर पूरे दिने के लिए स्थगित कर दी गयी।

उच्च सदन की बैठक दो बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे जब शुरू हुई तब कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कृषि विधि निरसन विधेयक 2021 को सदन में पेश किया। इसी दौरान विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया।

तोमर ने कहा कि सरकार बहुत विचार-विमर्श के बाद किसानों के कल्याण के लिए इन कानूनों को लेकर आई थी। उन्होंने कहा ‘‘लेकिन दुख की बात है कि कई बार प्रयत्न करने के बावजूद वह किसानों को समझा नहीं सकी।’’

कृषि मंत्री तोमर ने कांग्रेस पर दोहरा रूख अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्षी दल ने अपने घोषणापत्र में कृषि सुधारों का वादा किया था । उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरू नानक जयंती पर तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर बड़ा दिल दिखाया और यह उनकी कथनी और करनी में एकरूपता का परिचायक है।

उन्होंने कहा कि सरकार और विपक्षी दल दोनों ही इन कानूनों की वापसी चाहते हैं इसलिए कृषि कानून निरसन विधयक पर कोई चर्चा करने की जरूरत नहीं है।

इसके बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी दे दी। इस दौरान कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सदस्य विधेयक पर चर्चा के लिए हंगामा करते रहे। बिना चर्चा के विधेयक को मंजूरी दिए जाने पर विरोध जताते हुए तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन और नदीमुल हक आसन के समक्ष आ गए। विधेयक को मंजूरी दिए जाने के बाद उप सभापति हरिवंश ने दो बज कर दस मिनट पर बैठक आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी। दो बज कर 40 मिनट पर बैठक पुन: शुरू हुई तब उप सभापति एक बार फिर कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी।

चार बार के स्थगन के बाद अपराह्न तीन बज कर दस मिनट पर बैठक पुन: शुरू हुई तब संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने विपक्षी दलों के 12 सदस्यों को संसद के मॉनसून सत्र के दौरान अशोभनीय आचरण करने के लिए वर्तमान शीतकालीन सत्र की शेष अवधि के दौरान उच्च सदन से निलंबित किए जाने का प्रस्ताव रखा। उप सभापति हरिवंश ने प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी और कांग्रेस की फूलो देवी नेताम, छाया वर्मा, रुपिन बोरा, सैयद नासिर हुसैन, राजमणि पटेल, अखिलेश प्रताप सिंह, तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन, शांता क्षेत्री, माकपा के इलामारम करीब, भाकपा के विनय विश्वम, शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी और अनिल देसाई को शीतकालीन सत्र की शेष अवधि के दौरान उच्च सदन से निलंबित कर दिया गया।

इसके बाद तीन बज कर करीब बीस मिनट पर बैठक को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया।

इससे पहले, उच्च सदन की बैठक सुबह 11 बजे शुरू होने के बाद नवनिर्वचित सदस्यों को शपथ दिलाई गई। फिर सभापति एम वेंकैया नायडू ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और उच्च सदन के वर्तमान सदस्य ऑस्कर फर्नाडीज और पांच पूर्व सदस्यों के निधन का जिक्र किया। बैठक फर्नाडीस तथा पांच पूर्व सदस्यों को श्रद्धांजलि देने के बाद 11 बज कर 20 मिनट पर एक घंटे के लिए स्थगित कर दी गई।

एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बज कर 20 मिनट पर सदन की कार्यवाही आरंभ हुई। सभापति नायडू ने संसद के पिछले मॉनसून सत्र में हुए व्यवधान का उल्लेख करते हुए सदस्यों से इसकी पुनरावृत्ति ना करने का अनुरोध किया और उम्मीद जताई कि यह सत्र उपयोगी साबित होगा।

उन्होंने जैसे ही प्रश्नकाल आरंभ करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य जी वी एल नरसिम्हा राव का नाम पुकारा, विपक्षी सदस्य हंगामा करने लगे। कांग्रेस सहित कुछ अन्य दलों के सदस्यों ने कार्य स्थगन प्रस्ताव के नोटिस दिए थे, जिन्हें सभापति ने अस्वीकार कर दिए।

इसके बाद विपक्षी दल के सदस्य सभापति के आसन के निकट आकर हंगामा करने लगे। नायडू ने हंगामा कर रहे सांसदों से ऐसा ना करने का आग्रह किया और सदन में शांति बनाने की अपील की। हंगामा थमते नहीं देख उन्होंने सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

 

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